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काव्य संग्रह 'जुगनू मेरे शब्द' पर आयोजित 'कृति चर्चा'
August 25, 2019 • कोषा गुरुंग

नूतन गुप्ता की ओर से "पहली पोथी' पुरस्कार की घोषणा भी की गई। साठ साल की उम्र के पश्चात आने वाली पहली कृति के लिए ये पुरस्कार दिया जाएगा

जयपुर - सुश्री नूतन गुप्ता द्वारा रचित काव्य संग्रह 'जुगनू मेरे शब्द' पर आयोजित 'कृति चर्चा' आयोजक अजमेर पोएट्री क्लब(APC) एवं बोधि प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में बोधि प्रकाशन सभागार में आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ एवं लोकप्रिय जनकवि  कैलाश मनहर थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार, राजस्थानी भाषाविद एवं दूरदर्शन के सेवानिवृत्त निदेशक नंद भारद्वाज ने की।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि कवयित्री, चित्रकार, हस्तशिल्प कलाकार, शिक्षाविद एवं समाजसेवी अंजना टंडन थीं।
कार्यक्रम का खूबसूरत और सफल संचालन डॉ रेवंतदान ने किया। कार्यक्रम में शहर के साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरूआत महात्मा बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इसके बाद सभी मंचासीन अतिथियों को चुंदड़ी के दुपट्टे और फूलमाला पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

नूतन गुप्ता की पहली पुस्तक के रूप में इसे उनके साहित्यिक प्रतिभा की जमा पूंजी भी कहा जा सकता है।
नंद भारद्वाज जी ने अपने अंदाज में पुस्तक के बारे में कहा कि साठ साल की उम्र के बाद रची गईं ये कविताएं बहुत परिपक्व हैं।जीवन अनुभव से परिपूर्ण हैं जो हमें उनकी जीवन यात्रा से परिचित करवाती हैं। उन्होंने कहा कि कविताएं चाहे छोटी-छोटी हैं,उन पर बड़ी व्याख्या की जा सकती है

कैलाश मनहर जी ने अपनी आत्मीय और बेबाक राय देते हुए कहा कि इन कविताओं में सायास कुछ नहीं है बल्कि सहज सरल भावनाओं की धारा है। ये सहज बोध की कविताएं हैं।इनकी कविताएं संवेदनाओं के अनेकों द्वार खोलती हैं

अंजना टंडन जी ने बहुत भावपूर्ण अंदाज में कहा कि नूतन गुप्ता की कविताओं में स्पष्ट है कि जितनी बार राख होगी उतनी बार फिनीक्स उभरेगा। अपनी अपूर्णता और अधूरेपन में से खुरचकर वो दरार, खिड़की निकाल कर अपने होने में यकीन रखता है

पुस्तक चर्चा के दौरान महेश शर्मा ने 'नूतन गुप्ता की कविताओं में एकाकी पन और अवसाद' शीर्षक से सौरभ चढार का शोध पत्र पढ़ा और शिवानी शर्मा द्वारा वरिष्ठ साहित्यकार हितेष व्यास की विस्तृत समीक्षा का वाचन भी किया गया।
लेखिका ने अपने वक्तव्य में अपनी रचना धर्मिता और प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।साठ साल तक जमा भावनाओं का सैलाब यकायक ही कविता के रूप में बाहर आया। भाषा की क्लिष्टता की जगह भावों को प्रधानता दी है। उनका कहना है कि जीवन में जो है उस पर कविता नहीं होती है, जो नहीं है उस पर ही कविता होती है
 
कार्यक्रम के अंत में APC एवं बोधि प्रकाशन की ओर से प्रकाशन माया मृग ने सभी का आभार व्यक्त किया।
स्वागत भाषण शिवानी शर्मा ने दिया।

इस अवसर पर नूतन गुप्ता की ओर से "पहली पोथी' पुरस्कार की घोषणा भी की गई। साठ साल की उम्र के पश्चात आने वाली पहली कृति के लिए ये पुरस्कार दिया जाएगा।