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राष्ट्र निर्माण में चरित्र की महत्ता
September 9, 2019 • विजय सिंह बिष्ट

हमारे देश में कई महान मनीषियों ने जन्म लिया। जिसमें अपने चरित्र बल के आधार पर उन्होंने विश्व पटल पर अपना ही नाम नहीं भारत का नाम भी स्वर्णाक्षरों में अंकित किया।

यह वीर्य बलम् शौर्य बलम् और चरित्र बलम् की शक्ति थी। स्वामी विवेकानंद जीका तेजस्वी आकर्षित ब्यक्तित्व  कहते हैं अमेरिका में अपने बक्तब्य में खिसकते खिसकते नदी किनारे ले गया, तुलसीदास जी का काव्य संग्रह तथा रामचरित मानस हमारे चरित्र निर्माण का प्रतीक होने के साथ रचनाकार के चरित्र को बयां करता है । वेदों के रचनाकार व्यासजी, समाज सुधारक कबीर, दादू एवं प्रेमचंद जी की रचनाएं जहां समाज के चरित्र का निर्माण करते वहीं अपने चरित्र की छाप भी छोड़ते हैं।

रानी लक्ष्मीबाई जो अपने सैन्य संगठन के साथ अंग्रेजों से लड़ी अपने उज्जवल चरित्र का उदाहरण है।महा राणा प्रताप मुगलों से लड़ते-लड़ते जंगलों की खाक छानने लगे यह उनका चरित्रबल ही था। पुरातन इतिहास चरित्र की गाथाओं से भरा पड़ा है। हम अपने विद्यार्थी जीवन में भारत की महान विभूति नामक पुस्तक पढ़ते थे। यह कहने में संकोच होता है आज फूलन देवी , लालू प्रसाद यादव  जी एवं कितने ही भ्रष्ट नेताओंकी जीवनी पाठ्य पुस्तकों से हटाए जाने की बात उठती हैं 
 इससे भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने में तथा चरित्रवान बनाने में लाभ के बदले हानि ही होगी।
 

एक उक्ति थी।
धन गया कुछ नहीं गया,
स्वास्थ्य गया कुछ गया।                                                                                                                                    किंतु चरित्र चला गया तो सर्वस्व चला गया।
 

बर्तमान में सारा उलट गया चरित्रहीन राजसता में धन बल पर है जेल में हैं लूट-खसोट के कारण फिर भी छूट जाते हैं।
 धन है गुर्दे ,आंख घुटने फेफड़े हार्ट हर अंग प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
नव भारत का निर्माण नयी पीढ़ी के हाथ में है आशा करते हैं हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी नये भारत का निर्माण अपने अमिट चरित्र के बल आधार परभावी राजनीति में लाने में सक्षम होंगे।
राष्ट्र का निर्माण चरित्र का आधार।
स्वस्थ,स्वच्छ राजनीति हो साकार।