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लाभार्थियों के लिए PMAY [ U ] पुरस्कारों की स्थापना
August 8, 2019 • क़ुतुब मेल

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)-पीएमएवाई(यू)-मिशन ने शहरी क्षेत्रों में लगभग 112 लाख मकानों की मांग के विपरीत 85 लाख से अधिक मकानों की मंजूरी देकर एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इनमें से लगभग 50 लाख मकान निर्माण की विभिन्न अवस्थाओं पर है और 26 लाख से ज्यादा मकान पहले ही बनकर तैयार हो चुके हैं।

नयी दिल्ली - आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्यों/संघ शासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों और लाभार्थियों के योगदान को मान्यता प्रदान करने के लिए पहली बार लाभार्थियों के लिए पीएमएवाई(यू) पुरस्कारों की स्थापना की है। लाभार्थियों के लिए इस विशेष पुरस्कार से राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के लाखों लोगों के लिए आवास के सपने को साकार करने के लिए उत्साहित होने और साथ ही लाभार्थियों को टिकाउ पद्धतियों का उपयोग कर अपने मकान खूबसूरती से बनाने के लिए भी प्रोत्साहित करने की संभावना है।

विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कारों के लिए चयन की प्रक्रिया को राज्यों/संघ शासित प्रदेशों द्वारा निर्माण की दिशो में हुई प्रगति को एमआईएस प्रणाली में अपलोड किए जाने से जोड़ कर पारदर्शी बनाया गया है। यह पुरस्कार पीएमएवाई(यू) बैंकों और आवासीय वित्त कम्पनियों के योगदान को मान्यता देने वाले सीएलएसएस सम्मान के अलावा होगा।

पीएमएवाई(यू) पुरस्कारों की मुख्य विशेषता यह है कि ये मकानों को बेहद खूबसूरत और नवाचारी तरीके से निर्मित कराने से संबंधित 'लाभार्थी-नेतृत्व वाला निर्माण' संघटक के अंतर्गत प्रत्येक राज्य/संघ शासित प्रदेश से चुने गए लाभार्थियों को मान्यता और पुरस्कार प्रदान करेंगे। इसे सुगम बनाने के लिए, लाभार्थियों के पीएमएवाई(यू) मिशन के साथ प्रत्येक सम्पर्क के लिए आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री शहरी हरदीप एस. पुरी द्वारा इस साल फरवरी में पीएमएवाई(यू) मोबाइल एप लांच किया गया।

यह मोबाइल एप लाभार्थियों द्वारा पीएमएवाई(यू) के अंतर्गत आवास का स्वामित्व ग्रहण करने की सफल गाथाओं को रेखांकित करने के लिए हाई-रेज़लूशन फोटोग्राफ और वीडियो क्लिप अपलोड करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस मोबाइल एप की अब तक समस्त राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में 50,000 से ज्यादा लाभार्थियों तक पहुंच कायम हो चुकी है।

इन पुरस्कारों में भाग लेने की अंतिम तिथि 20 अगस्त, 2019 है।