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हमारी तीसरी पीढ़ी किसी रिश्ते को नहीं जानती
September 11, 2019 • विजय सिंह बिष्ट

मानव जीवन में जिस प्रकार मौसम का प्रभाव पड़ता है उसी प्रकार लगातार रिश्तों में भी पीढ़ी दर पीढ़ी बदलाव होता चला आ रहा है। इस का प्रमुख कारण विघटित परिवार और पलायन ही कहा जा सकता है। गांव छोड़ कर लोग रोजी-रोटी की तलाश में शहरों की ओर चले जा रहे हैं।

एक जमाना ऐसा भी था लोग घर और जन्म भूमि छोड़ना ही नहीं चाहते थे। कृषि  और पशुपालन मुख्य व्यवसाय था, पहाड़ी क्षेत्र में बने सीढ़ी नुमा खेत सामूहिक साझेदारी और रिश्तेदारों के बल पर ही बने होंगे। इन भू भागों का नाम सीमा और रिश्तेदारों के सहयोग के नाम पड़े होंगे ,गुडियल खील गुड़ियाल जाति के लोगों द्वारा बनी जमीन,रिखीखेत,रिखी नाम के आदमी ने बनवाई होगी।कैलाड की खोली, सीमा और रिश्तेदारों के सहयोग से बनी जमीन।

 किसी भी समारोह अच्छे या बुरे में नाना नानी,मा मा मामी जीजा फूफा  सास ससुर का समलित होना रिश्तों की पहचान थी। मेलों में सारे मित्र आपस में मिला करते थे। आज  न मेले हैं नहीं गांवों में रिश्तेदार। यहां तक पीढ़ी दर पीढ़ी पहिचान भी गायब है पता ढिकाना भी खोज कर नहीं मिलता।
 वह जमाना जब संयुक्त परिवार होते थे, विशाल परिवार, दादी की गोद में पांच दस बच्चे बैठने की जिद लिए होते,ताई चाची  चक्की चलाती, बड़ी भाभी छोटी के साथ कुटाई करती।खाना पकाने वर्तन धोने के सारे काम बंटवारे के साथ होते थे। ताऊजी के हिस्से में बकरी चराना, चाचा जी पिता जी के साथ खेत काम करते।ताई का काम उनके लिए कलेवा ले जाना, छोटी चाची और भाभियों का गाय चरना घास लकड़ी की व्यवस्था करना था।आज न संयुक्त परिवार ही हैं नहीं यह जखेरा । पलायन , नौकरी ,व्यवसायी करण ये सारे उपवन्ध  अब नहीं रहे हैं। गांव बीरान हैं खेत बंजर मकानों पर ताले रिश्तों की टूटती डोर ये सब दिखाई देता है।

शहरों की दशा भी अपनी यही कहानी कहती है। बेटे बहू नाती पोते सब अपने अपने कामों में। बेटे एक ही घर में अलग अलग रहते, माता पिता साथ तो हैं किन्तु ओल्ड एज होम में। जिनके विदेश में हैं उनका तो भगवान भरोसा है। यह बड़ी विडम्बना है कि हमारी तीसरी पीढ़ी किसी रिश्ते को नहीं जानती।आज हर आदमी को लेने  की बेचैनी और अपना खो देने का डर सताता है यही उसके जिंदगी का सफर बन चुका है। परिवर्तन निश्चित है जमाने के गीत  त्योहार आपसी प्यार प्रेम  के रिश्ते शायद कभी लौट कर आयेंगे । कामना करते हैं। दरकते परिवार और टूटते रिश्ते  बचाने के लिए किसी न किसी को प्रयास  करना होगा। जिसके लिए कई लोगों ने जीवन को अर्पित कर दिया था।