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21 जनवरी से नई दिल्ली में भारत की पहली वैश्विक,मेगा-विज्ञान प्रदर्शनी
January 17, 2020 • नूरुद्दीन अंसारी • अंतर्राष्ट्रीय
  • दो महीने तक चलने वाली यह प्रदर्शनी विश्वभर की मेगा विज्ञान परियोजनाओं में भारत का दम-ख़म दिखायेगी 
  • छात्रों और विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए अभिनवकारी कार्यक्रमों की मेजबानी करेगी
  • यह प्रदर्शनी दुनिया की जानी-मानी मेगा साइंस परियोजनाओं में भारतीय उद्योग के योगदान को प्रदर्शित करेगी
  • विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले लोग राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र दिल्ली में विश्व प्रसिद्ध मेगा विज्ञान परियोजनाओं को देखेंगे 
  • कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात वैज्ञानिकों के साथ बातचीत करने का मौका
  • पूरे कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों के बीच वैज्ञानिक प्रवृति का विकास करने के लिए सार्वजनिक स्तर पर जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे।

नई दिल्ली : भारत की पहली बहु-स्थलीय मेगा विज्ञान प्रदर्शनी,'विज्ञान समागम' 21 जनवरी से राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र दिल्ली में शुरू की जायेगी। यह प्रदर्शनी जनता के देखने के लिए खुली रहेगी, जिसमें ब्रह्माण्ड को समझने में अंतर्राष्ट्रीय समूहों के प्रयासों को प्रदर्शित किया जायेगा और पूरे अंतरिक्ष और समय में सूक्ष्म से स्थूल स्तर तक मानव के ज्ञान और जिज्ञासा के विस्तार को प्रदर्शित करेगी। 8 सप्ताह के बाद, 20 मार्च 2020 को इस प्रदर्शनी का समापन होगा।

प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा किया जायेगा। 

मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में सफलता प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र दिल्ली 11 महीने की 4-शहरों से होकर आनेवाली प्रदर्शनी के अंतिम चरण की मेज़बानी करेगा। इससे पहले आयोजित किए गए संस्करणों में, विज्ञान समागम मुंबई और बेंगलुरु में बहुत अधिक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई जो कि दोनों स्थानों पर लगभग 1.3 लाख लोगों के देखने आने से साफ़ तौर पर नज़र आती है। कोलकाता में लगभग 3 लाख आगंतुकों के साथ आनेवाले लोगों की संख्या दोगुनी हो गई। राष्ट्रीय राजधानी को मेगा साइंस प्रदर्शनी की मेज़बानी करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जिसने पिछले तीन संस्करणों से अब तक 5.5 लाख से अधिक लोगों को आकर्षित किया है। ज़मीनी स्तर पर होने वाले कार्यक्रम के अलावा, डिजिटल और सोशल मीडिया के अभियानों ने विज्ञान समागम को पूरे देश के लाखों लोगों तक पहुँचाया दिया है।

उद्घाटन समारोह में डॉ. आर. चिदंबरम, भारत सरकार के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार, परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के सचिव; डॉ. पॉल हो, महानिदेशक, ईस्ट एशियन ऑब्ज़र्वेटरी, हवाई, यूएसए; के.एन. व्यास, अध्यक्ष, एईसी और सचिव, डीएई; प्रो. आशुतोष शर्मा, सचिव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी); योगेन्द्र त्रिपाठी, सचिव, संस्कृति मंत्रालय शामिल होंगे। पॉल हो इस अवसर पर मुख्य भाषण देंगे।

परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) संयुक्त रूप से इस बहु-स्थलीय मेगा-विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन कर रहे हैं, जो दुनिया की कुछ सबसे बड़ी विज्ञान परियोजनाओं को एक ही स्थान पर प्रदर्शित कर रही है।

विज्ञान समागम के अंतिम संस्करण की प्रमुख बातों, उद्देश्यों और गतिविधियों का विवरण देते हुए नई दिल्ली में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। अरुण श्रीवास्तव, सचिव एईसी, और प्रमुख, संस्थागत सहयोग एवं कार्यक्रम प्रभाग (आईसीपीडी), डीएई, मुंबई; डॉ. प्रवीर अस्थाना, इंस्पायर और मेगा विज्ञान संभागों के प्रमुख, डीएसटी, दिल्ली ने संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम की घोषणा की और विज्ञान समागम से संबंधित उद्देश्यों और विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया।

इस प्रदर्शनी में दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक प्रयोगों और आधुनिक विज्ञान में प्राप्त की गईं प्रमुख मौलिक सफलताओं के लिए भारत के योगदान को दर्शाया जायेगा, और अग्रणी विज्ञान और प्रौद्योगिकी की रोमांचक दुनिया के बारे में जागरूकता की विस्तृत जानकारी प्रदान की जायेगी। विज्ञान समागम प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत में मेगा-विज्ञान के तीन स्तंभों, उद्योग, शिक्षाविद और छात्रों के लिए एक ही पारस्परिक प्लैटफॉर्म प्रदान करना है। यह विभिन्न प्रकार के दर्शकों की मेज़बानी करेगी और सभी हितधारकों के बीच अधिक से अधिक बातचीत के लिए मार्ग प्रशस्त करने के द्वारा विचारों के आदान-प्रदान और विकास को संभव बनायेगी।

मेगा साइंस प्रोजेक्ट्स यूरोपियन ऑर्गेनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सीईआरएन), फैसिलिटी फॉर एंटिप्रटन और आयन रिसर्च (एफएआईआर), इंडिया-बेस्ड न्यूट्रीनो ऑब्ज़र्वेटरी (आईएनओ), इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर न्यूमेंटल रिएक्टर (आईटीईआर), लेज़र इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल - वेव ऑब्ज़र्वेटरी (एलआईजीओ), मेजर एटमॉस्फेरिक चेरेनकोव एक्सपेरिमेंट्स (एमएसीई), स्क्वायर किलोमीटर एरे (एसकेए) और थर्टी मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी)।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्री अरुण श्रीवास्तव ने कहा, “विज्ञान समागम वैश्विक विज्ञान परियोजनाओं और विज्ञान के प्रति रूचि रखने वाले लोगों और छात्रों को विकसित विज्ञान के संपर्क में लाकर प्रोत्साहित करने के एक संपूर्ण प्रयास की एक परिणति है। इस प्रयास से यह ज़ाहिर होता है कि कैसे भारत अपने विश्वस्तरीय समकक्षों के साथ अनुसंधान के मामले में एक ही स्तर पर पहुँच गया है और वैज्ञानिक समुदाय के लिए उसका योगदान कितना महत्वपूर्ण है। यह प्रदर्शनी छात्रों को परियोजनाओं को अपनी आँखों के सामने देखने और अनुभव करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगी।” विज्ञान समागम के उद्देश्यों और इसके सफर की जानकारी देते हुए, श्री अरुण श्रीवास्तव ने कहा, “यह मेगा विज्ञान प्रदर्शनी छात्रों और विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले लोगों दोनों के लिए दिल्ली का एक प्रमुख वैज्ञानिक स्थल होगी।

डॉ. प्रवीर अस्थाना ने विज्ञान को भविष्य बनाने के एक आकर्षक विकल्प के रूप में स्थापित करने में विज्ञान समागम की प्रासंगिकता पर जोर दिया और कहा, “भारत में वैज्ञानिक समुदाय को और अधिक वैज्ञानिकों की आवश्यकता है और युवाओं को प्रत्यक्ष परियोजनाओं के माध्यम से विज्ञान के रोमांच का अनुभव कराने के लिए उन्हें एक प्लैटफॉर्म प्रदान करने से बेहतर तरीका और क्या हो सकता है। विज्ञान समागम में केवल परियोजनायें से बढ़कर और भी बहुत कुछ होगा क्योंकि हमने वैज्ञानिकों की ओर से अनेकों व्याख्यानों और वार्ताओं की व्यवस्था की है, जिसमें छात्र भाग ले सकते हैं और अपनी दिलचस्पियों के बारे में और अधिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। हम चाहते हैं कि भविष्य में अधिक से अधिक छात्र विज्ञान को एक भविष्य के विकल्प के रूप में अपनायें।"

राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र दिल्ली के निदेशक डॉ. राम सरमा ने अपने एक संदेश के माध्यम से कहा कि विज्ञान समागम राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र दिल्ली के लिए आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र होंगे और यह छात्रों और विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को देश की मेगा विज्ञान परियोजनाओं और उनसे संबंधित विकास कार्यों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेंगे।

उद्घाटन कार्यक्रम के बाद 'साइंटर स्टेज’ नामक एक विज्ञान पर आधारित एक प्रमुख कार्यक्रम होगा जिसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग के क्षेत्र के प्रसिद्द वक्ताओं द्वारा आमंत्रित वार्तायें, व्याख्यान और पैनल चर्चायें शामिल होंगी। भाग लेने वाले मेगा साइंस प्रोजेक्ट्स के साथ काम करने वाले औद्योगिक सहयोगी अपने योगदान का प्रदर्शन करने के लिए कार्यक्रम स्थल पर एक औद्योगिक प्रदर्शनी लगायेंगे। 

इस अंतिम संस्करण में भारत और विदेशी देशों के विश्व-प्रसिद्द वैज्ञानिकों, नवोदित वैज्ञानिकों, विज्ञान के प्रति रूचि रखने वाले लोगों, छात्रों, उद्योगों, शिक्षाविदों, संस्थानों और दिल्ली और दिल्ली आसपास के राज्यों के लोगों को एक ही स्थान पर एकत्रित करने के साथ एक विशाल भागीदारी होने की उम्मीद है।

वैश्विक, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठनों ने भाग लेंगे

विज्ञान समागम में सीईआरएन, एफएआईआर, आईएनओ, आईटीईआर, एलआईजीओ, एमएसीई, एसकेए, और टीएमटी जैसी प्रतिष्ठित परियोजनायें और संगठन भाग लेंगे। छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों के अलावा, दर्शकों में विभिन्न वैज्ञानिक संगठनों, उद्योगों और शिक्षाविदों से आमंत्रित सदस्य भी शामिल होंगे।

विज्ञान संचार और सार्वजनिक संपर्क

परियोजना जागरूकता गतिविधियों के तहत, भाग लेने वाली हर एक परियोजना में बहुचर्चित वार्तायें, विज्ञान के प्रदर्शनों, पारस्परिक प्रश्नोत्तरी के कार्यक्रम  आदि से भरपूर एक सप्ताह तक चलने वाली गतिविधियाँ होंगी। स्कूलों को शामिल करने वाली सार्वजनिक-स्तर पर संपर्क स्थापित करना इस कार्यक्रम का एक अभिन्न अंग है। नवीनतम जानकारियाँ विज्ञान समागम के डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रदान की गई हैं।

प्रदर्शनी, परियोजनाओं और कार्यक्रम की सूची के बारे में विवरण विज्ञान समागम की वेबसाइट www.vigyansamagam.in पर और मोबाइल ऐप 'विज्ञान समागम' पर भी उपलब्ध हैं। प्रदर्शनी के दौरान आयोजित वार्ताओं, व्याख्यानों जैसे कार्यक्रम लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से सीधे प्रसारित किए जायेंगे। यह प्रदर्शनी 20 मार्च 2020 तक शनिवार, रविवार और छुट्टियों समेत सभी दिनों में प्रातः 10 बजे से सांय 6 बजे तक खुली रहेगी।