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अक्सर बुराई तभी पनपती है जहां उम्मीदें ज्यादा हो
February 7, 2020 • संत कुमार गोस्वामी • साहित्य

संत कुमार गोस्वामी

आज सुबह-सुबह वह अपने मूड का ख्याल किए बिना   चिंता के गर्त में डूबते चले गए। लगभग 2 घंटे चिंताओं का  सिलसिला उनके दिमाग को थका दिया उसके बाद एक बात उनके मन में आया। काश हमें भी सब कुछ होता  सारे जहां की खुशियां मेरे पास होती ऐसे पुला वी पकवान मन में बुनते रहे तब तक पुतुल गिरी ने आवाज लगाई सूरज ......सूरज भाई उठो सुबह के 8:00 बज गए हैं इस सारी बातें सूरज की दिमाग की गतिविधि को पुतुल समझ गई हर रोज की तरह आज भी दिमाग मन को थका रहे  हैं...... फिजूल व्यर्थ की चिंता उनको हर रोज कमजोर व चिरचिरा बना दिया है l

पुतुल जानते हो सूरज किसी का परवाह नहीं करता बस उम्मीदें ज्यादा करने से किसी पर पूरा ना होने के कारण भरोसा भी टूट जाता है आदमी आदमी से दूर होते चला जाता है जानते हो ऐसा क्यों होता है समझा दो मुझे पुतुल बहन...... पुतुल गुस्से में जानती है सूरज भाई इस काम के सिवा तुम्हें कुछ सूझता नहीं बस एक ही रट लगाए रहते हो कोई मेरे काम आता नहीं आएगा भला कैसे यह बातें पुतुल सूरज को समझाती हुई बोली अक्सर हम तभी टूटते हैं जब किसी पर ज्यादा भरोसा करने लगते हैं यही कारण है आप सूरज भाई ज्यादा परेशान है हताश रहते हो अपने जो हुलिया बना रखा है हर कोई तरस खा जाएगा को देखकर  सुधार कर लो कब तक ऐसे ख्यालों में डूबे रहोगे इस से निकल कर तो देखो दुनिया कितनी लंबी चौड़ी है तुम्हारा मित्र तीर्थ नाथ पांडे को जानते हैं आपके मित्र हैं वह कितना कष्ट पूर्ण जिंदगी जी रहे हैं फिर भी इरादा मजबूत कर अगले कदम जाने की होड़ में रहते हैं उनसे भी तो सीखो सूरज भाई हां बहन आप ठीक करती हो आज ही उनके घर जा रहा हूं अब ऐसे रवैया से तंग आ चुका हूं

कल भी सोचा था जाऊंगा अपने मित्र के यहां आज जरूर जाऊंगा फिर सोच में पड़ गए.....आज तीर्थ नाथ पांडे के यहां जाएंगे जाने के बाद बहुत सारे मन में ख्याल बुनने लगे उनके हर एक सोच से खुशी मिलती चली गई......झटपट तीर्थ नाथ पांडे के यहां चले गए सूरज को देखते ही   पांडे बोले सब ठीक-ठाक सूरज।  सूरज बोला क्या ठीक होगा पांडे जी सब बात जानते कोई बात नहीं अब चिंता छोड़ो सुख से रहो यह आपकी युक्ति अपनाकर जीवन सुख में कर लेना है