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अनूठी पहल : मंदिरों में  फैंके गए फूलों का उपयोग
January 17, 2020 • सुरेखा शर्मा  • राष्ट्रीय

यदि दिल में कुछ करने का जज्बा हो तो लाख रुकावटें, बाधाएँ भी  उसका  रास्ता नहीं रोक सकती ।देखा जाए तो  देश व समाज के लिए कोई नेक कार्य करने का हौंसला सभी में नही होता ।बातें करने वाले व उपदेश देने वाले  हजारों लोग मिल जाते हैं ,पर उसी कार्य को अंजाम देने वाले तो  विरले ही होते हैं। इसमें भी कोई दो राय नहीं कि हमें अपने आसपास  सभी  पर्यावरण प्रदूषण की चिंता में ग्रस्त व्यक्ति मिल जाते हैं लेकिन उनमें से कितने लोग ऐसे हैं जो चिंता करने के साथ ही साथ पर्यावरण संरक्षण की व इस दिशा में सार्थक प्रयास  करते हों ? इसी दिशा में एक मुहिम छेड़ी है गुरुग्राम की पूनम सहरावत ने ।

हां,एक ऐसा अनूठा कार्य जिसके बारे में शायद ही कोई सोच सकता हो। सोच भी ले ,लेकिन क्रियात्मक रूप  देकर साकार  करके दिखाना हर किसी के वश की बात नही । हम सलाम करते हैं ऐसी युवा पीढ़ी की प्रतिभा को जो पर्यावरण संरक्षण तो कर ही   रही हैं साथ-ही-साथ बहुपयोगी वस्तुओं का निर्माण कर योजना को साकार रूप देकर न जाने कितनी महिलाओं को स्वावलंबी भी  बना रही हैं ।  हम बात कर रहे हैं  "आरोही इन्टरप्राइजेज" नाम की संस्था की जिसकी स्थापना की है पूनम सहरावत ने । जिसमें हस्त निर्मित सामग्री का निर्माण किया जाता है वो भी बेकार पड़े फूलों से।जिन्हें हम कूड़े -कचरे के ढेर में बेकार समझकर फैंक देते हैं । उन्ही फूलों को इकट्ठा करके बनाई जाती हैैं सुगंधित धूप -अगर बत्ती, धूप -स्टैंड, गणपति प्रतिमा ,स्वस्तिक चिह्न, शुभ-लाभ आदि आदि ।एक और विशेष बात जो भगवान को वस्त्र पहनाए जाते हैं , माता को चुनरियां चढाई जाती हैं।जिन्हें बाद में फैंक दिया जाता है, उसका उपयोग भी बखूबी किया जा रहा है ।उनके छोटी -छोटी पैकिंग पोटली बनाई जाती हैं। है न हैरान कर देने वाली बात !

यह अनोखा कार्य करने का ख्याल उन्हें कैसे आया ? संस्था की संस्थापिका ने बताया कि जब भी वे मंदिर जाती तो देखती कि जो फूल व फूल मालाएँ भगवान पर चढाई जाती हैं कुछ देर बाद उतार कर उन्हें एक ओर  इकट्ठा कर  दिया जाता है।जब ढेर लग जाता है तो  कूड़ा-कचरा समझकर फैंक दिया जाता है।जिन्हें लोग पैरों तले रौंदते हुए चले जाते हैं।यही सब देखकर मन में विचार आया कि क्यों न फूलों को इकट्ठा करके हमें इनका उपयोग करना चाहिए । बस तभी से  मन -ही-मन संकल्प लिया कि कुछ करना है।गूगल पर सर्च करके उपयोग करने के तरीके खोजे गए । कैसे इन फूलों से उपयोगी चीजें बनाई जा सकती हैं। जिनमें से मुख्य हैं धूप -अगर बत्ती आदि ।

उसी पल आईडिया दिमाग में घर कर गया और  दृढ़ निश्चय से  महिलाओं को साथ लेकर मन्दिर -मन्दिर जाकर फूल एकत्र  कर हम सभी ने  इस कार्य को अंजाम दिया । इन फूलों से आर्गेनिक धूप अगरबत्ती बनाई जाने लगी । जो अच्छे व ताजे पुष्प होते हैं उनसे सुगंधित धूप बनाई जाती है और खराब हुए फूलों से खाद तैयार की जाती है ।सुगंधित बनाने के लिए लोबान व कपूर का प्रयोग किया जाता है । देखते ही देखते इस नेक कार्य में महिलाएँ जुड़ने लगी। सबके सहयोग से एक छोटा- सा औद्योगिक  प्लांट बन गया ।जो सपना पूनम सहरावत ने देखा था वो पूरा हो गया ।आज 15 से 20 महिलाएँ इस संस्था में कार्य कर अपना सहयोग दे रही। पर्यावरण की रक्षा भी हो रही है। जब कोई मूर्ति या अन्य वस्तु खंडित हो जाए तो उन्हें इधर-उधर कहीं फेंकने की जरूरत नही पौधों में डाल दिया जाए तो खाद का काम करेंगी ।
            
        'आरोही इन्टरप्राइजेज ' संस्था का यही संदेश है कि मजबूत इरादे, नई सोच व शिद्दत के साथ जो कार्य किया जाए तो एक दिन कामयाबी उसके कदम चूमती है । ये भी सच है कि कुछ भी नया करने के लिए  चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।जिनका सामना पूनम सहरावत को करना पड़ा ।  जब इस कार्य को करने के लिए मंदिरों के पुजारियों  से संपर्क किया तो कुछ सहयोग देने के लिए तैयार हो गए, लेकिन कुछ ने मज़ाक उडाया ।ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय उनका निश्चय और दृढ़  होता गया ।  दूसरी ओर ये भी कहती हैं कि परिवार का साथ उन्हें भरपूर मिला। इस बात  से भी वे इन्कार नही करती कि यदि एक कदम हम बढ़ाते हैं तो दस कदम हमारे साथ  हो लेते हैं। इस तरह एक समूह काम करने लगा। उनका सपना है कि उनकी संस्था जिस उद्देश्य को लेकर चली है उसे पूरा करने  व  महिलाओं को समर्थ व स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ उन्हें अपनी पहचान दिलवाने में सहायक हो।