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देश के राजनैतिक दलों की चुप्पी 7 करोड़ व्यापारियों के लिए घातक
November 26, 2019 • क़ुतुब मेल • बिज़नेस

देश भर में हुए विरोध मार्च में व्यापारियों ने बेहद रोष और आक्रोश के साथ अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट के खिलाफ नारे लगाए और अपने हाथों में विभिन्न प्लेकार्ड  " अमेज़न -फ्लिपकार्ट गो बैक-गो बैक  ", "अमेज़न फ्लिपकार्ट के पंजे से -ई कामर्स को मुक्त कराओ"," विषाक्त ई कॉमर्स -नहीं चलेगा ,नहीं चलेगा" ," प्रीडेटरी प्राइसिंग -डीप डिस्कॉउंटिंग, बंद करो-बंद करो" ," अमेज़न फ्लिपकार्ट -ईस्ट इंडिया कंपनी का दूसरा रूप " जैसे नारो के साथ अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट का जबरदस्त विरोध किया !

नयी दिल्ली - कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट द्वारा देश के ई कॉमर्स एवं रिटेल बाजार को विकृत किये जाने के खिलाफ चलाये जा रहे देशव्यापी अभियान के अंतर्गत आज कैट ने देश के 500 से अधिक जिलों एवं 300 से अधिक शहरों में " विरोध मार्च " निकाल कर सभी जिलों के कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देकर सरकार से मांग की गई की अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट को दूसरी ईस्ट इंडिया कंपनी बनने से रोका जाए!

विरोध प्रदर्शन में देश भर में लगभग 10 लाख व्यापारियों ने भाग लिया ! देश भर में हुए विरोध मार्च की इस श्रंखला का नेतृत्व दिल्ली में हुए एक विशाल विरोध मार्च से किया गया जिसका नेतृत्व कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने करते हुए देश के सभी राजनैतिक दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा की देश के 7 करोड़ व्यापारियों और उनसे जुड़े लगभग 40 करोड़ लोगों की रोज़ी रोटी के इस बड़े सवाल पर सभी राजनैतिक दल चुप्पी साधे हुए हैं ! आज तक एक भी बयान किसी भी दल का नहीं आया है जो व्यापारियों के लिए बेहद चिंता का विषय है ! इस मुद्दे पर सभी राजनैतिक दलों की चुप्पी से देश के व्यापारी सभी दलों का बायकाट करने पर मजबूर हो जाएंगे !

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने देश के ई कॉमर्स व्यापार में अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट के अनैतिक व्यापार को एक आर्थिक महामारी बताते हुए कहा की यदि न कंपनियों को अपनी मनमानी से नहीं रोका गया तो भविष्य में और विदेशी कंपनियां भारत में व्यापार करने आएँगी और इसी तरह से सरकार की नीति एवं कानून को धता बताते हुए देश के रिटेल व्यापार को अपनी मर्ज़ी से चलाएंगी और 45 लाख करोड़ रुपये के भारत के रिटेल बाजार पर एकाधिकार स्थापित करते हुए कब्ज़ा करेंगी ! उन्होंने कहा की अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट ईस्ट इंडिया कंपनी का दूसरा संस्करण बनने की कोशिश कर रही हैं जिसे रोका जाना बेहद जरूरी है !

 भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा की बेहद अफ़सोस की बात है की इन दोनों कंपनियों द्वारा एफडीआई पालिसी का घोर उल्लंघन, लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, भारी डिस्काउंट देना, बाजार में कीमतों को प्रभावित करना, समान प्रतिस्पर्धा के वातावरण को न बने रहने देना , विभिन्न उत्पादों का केवल इन्ही के पोर्टल पर बेचना, सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान पहुँचाना आदि अन्य अनैतिक व्यापारी प्रथाओं के खिलाफ कैट ने सभी स्तरों पर शिकायत करते हुए पर्याप्त सबूत भी दिए हैं लेकिन आश्चर्य है की इन कंपनियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई जिससे देश भर के 7 करोड़ व्यापारियों में बेहद रोष और आक्रोश है !