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FDI नीति में ई-कॉमर्स कंपनियों को केवल बाज़ार के रूप में काम करना होगा 
October 10, 2019 • क़ुतुब मेल

नयी दिल्ली - कैट द्वारा उठाए गए मुद्दे के प्रभाव और महत्व को समझते हुए गोयल ने गुरु मोहपात्रा,सचिव डीपीआईआईटी को निर्देश दिया कि वे अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट दोनों को बुलाएँ ताकि कैट  द्वारा उठाए गए बिंदुओं को स्पष्ट किया जा सके और अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट दोनों  के साथ कैट की बैठक होनी चाहिए।

मंत्रालय के अधिकारियों की उपस्थिति में मामले को सुलझान ज़रूरी हैं । यह मुद्दा जो लंबे समय से लटका हुआ है उसे सभी के लिए एक बार सुलझाया जाना चाहिए और ई कॉमर्स कंपनियों को न केवल कानून में बल्कि नीति की स्पिरिट में भी एफडीआई नीति का पालन करना होगा। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि अगर जरूरत पड़ी और अनैतिक व्यावसायिक प्रथाएं सिद्ध हो जाती हैं, तो सरकार जांच का आदेश दे सकती है।

पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री के साथ बैठक में कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट ) के एक प्रतिनिधिमंडल ने सरकार की एफडीआइ नीति के विपरीत अपने व्यापार मॉडल का संचालन करने वाले ई कॉमर्स कंपनियों के अनैतिक व्यापार मॉडल पर व्यापक चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि ई कॉमर्स कंपनियां लागत से भी कम मूल्य, गहरी छूट, हानि वित्तपोषण और विभिन्न उत्पादों की बिक्री केवल वे कामर्स पोर्टल पर ही उपलब्ध होने जैसे बिज़्नेस मॉडल को चला रही हैं जिन्हें एफडीआई नीति के तहत अनुमति नहीं है।

कैट प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इसके राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने किया और इसमें अरविंदर खुराना,अध्यक्ष,ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन, धैर्यशील पाटिल,अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्पाद वितरण महासंघ के अध्यक्ष और सुमित अग्रवाल,राष्ट्रीय प्रमुख, सोशल मीडिया शामिल थे।

 पीयूष गोयल ने प्रतिनिधिमंडल को कहा कि सरकार अपने एफडीआई नीति को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी परिस्थिति मे लागत से भी कम मूल्य या गहरी छूट की अनुमति नहीं दी जाएगी। यहां तक कि एक स्तर की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का वातावरण निर्माण करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी है। ई-कॉमर्स में व्यापार के किसी भी डाइवरजन की अनुमति नहीं दी जाएगी। एफडीआई नीति में ई-कॉमर्स कंपनियों को केवल बाज़ार के रूप में काम करना होगा 

विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियों के संबंधित प्लेटफार्मों पर लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचा जाना ,गहरी छूट, विशिष्टता से संबंधित विभिन्न सबूतों को दर्ज करते हुए, प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सरकार की एफडीआई नीति की भावना और मंशा के खिलाफ, ई-कॉमर्स कंपनियां क़ीमतों को बहुत प्रभावित कर रही हैं जो एफडीआई नीति के तहत कड़ाई से निषिद्ध है। सरकार की नाक के नीचे वर्षों से इस नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं लेकिन अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ये ई-कॉमर्स कंपनियां अनैतिक व्यापार प्रथाओं द्वारा ऑफ़लाइन व्यापारियों के व्यापार को छीन रही हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने गोयल से ई-कॉमर्स पोर्टल में विशेष रूप से विक्रेताओं द्वारा किए गए व्यवसाय की मात्रा और उनकी विशिष्टता का सरकारी लेखा परीक्षा शुरू करने की मांग की। यह भी मांग की कि अंतरिम उपाय के रूप में इस तरह के ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए  कैश ऑन डिलीवरी की व्यवस्था बंद होनी चाहिए और उपभोक्ताओं द्वारा सभी भुगतान डिजिटल तरीके से किए जाने चाहिए। उपभोक्ताओं की शिकायतों को देखने के लिए एक ई-कॉमर्स लोकपाल का गठन किया जाना चाहिए। ऐसी ई-कॉमर्स

कंपनियों के लिए डेटा स्थानीयकरण की शर्त को अनिवार्य किया जाना चाहिए। एफडीआइ नीति में निर्धारित नियमों और विनियमों को DPIIT द्वारा एक अलग अधिसूचना के माध्यम से घरेलू ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी लागू किया जाना चाहिए। लंबे समय से लंबित ई वाणिज्य नीति को जल्द से जल्द जारी किया जाना चाहिए और लागू किया जाना चाहिए ताकि भारतीय ई वाणिज्य बाजार कुछ प्रमुख ई-कॉमर्स खिलाड़ियों की इच्छाशक्ति और सनक का शिकार न हो।