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हर धर्म अपने को दूसरे से महान समझता है
December 10, 2019 • विजय सिंह बिष्ट • साहित्य

विजय सिंह बिष्ट

भारतीय संस्कृति और सिद्धांत नैतिक रूप से यह स्वीकार नहीं करते कि मां भारती की गोद में रहने वाला हर भारतीय एक है। इस शिक्षा की इतनी कमी है कि हर धर्म अपने को दूसरे से महान समझता है। जातियों में बंटा हुआ इंसान सामान्य रूप से यह नहीं जानते कि वह पहले भारतीय हैं भारतीय ये भूल चुके हैं कि 1400साल पहले वे सब एक ही धर्म के लोग थे। अब ऐसा लगता है कि हम हिंदू, मुस्लिम ईसाई मिशनरियों में बंटे रोग पीड़ित भारतीय हैं।

इस बंटवारे ने एक बीमार संस्कृति का रस और रूप धारण कर असमानता में परिणित करने में एक दूसरे के विपरीत कर दिया। यही कारण है विभिन्न विचारों ने भारत में भ्रष्टाचार की जड़ें जमाने में भारतीयों को असहज ही भ्रष्टाचारी बना डाला। भारतीय भ्रष्ट व्यक्ति का विरोध करने के बजाय उसे स्वीकार कर लेता है। यही कारण है कि हर भारतीय के मन में ईश्वर के प्रति भी यही भाव जागृत होता है। वह मंदिर मस्जिद जाकर ईश्वर को भी अपनी भ्रष्टाचारी  भेंट ही अर्पित करता है। मैंने संसार के भ्रष्टाचार मुक्त देशों में शीर्ष पर गिने जाने वाले न्यूजीलैंड के लेखक ब्रायन का एक लेख पढ़ा था , जो भ्रष्टाचार की समीक्षा करता है कि भारतीय एक अनियंत्रित विचारों और स्वार्थ की संस्कृति वाले लोग हैं।ये उनके निजी विचार हैं कोई भी लेखक अपने भावों को कालखंड पर आधारित होकर ही व्यक्त करता है।

भारतीय भगवान में चढ़ावा इस आसय पर भी देते हैं कि उनकी यश कीर्ति हो,2009में माननीय मंत्री जनार्दन रेड्डी जी का 45करोड़ मूल्य आभूषण तिरुपति जी में चढ़ाने की खबर मंदिरों में पड़ी अकूत व्यर्थ पड़ी धन राशि को बढ़ाना मात्र है। अच्छा होता विद्यालय  या स्वास्थ्यालय का निर्माण करवाया जाता,स्वर्गीय जयललिता जी के अमूल्य वस्त्र और चप्पलें यदि गरीबों में बांट दिए होते तो उन्हें दुवाओं का आशीर्वाद मिलता, साथ तो सिकंदर भी नहीं गया। भ्रष्टाचार के कई उदाहरण इतिहास के गर्भ में छिपे हुए हैं।प्लासी के युद्ध में भारतीय सैनिकों  ने कठिनाई से मुकाबला किया,मीर जाफर को पैसे दिए गए और पूरी बंगाल सेना 3000 में समिट गई।अभी हनुमान मंदिर की कमाई का समाचार भी आयकर विभाग भ्रष्टाचार को ही इंगित करता है।

पिछले दिनों महाराष्ट्र की राजनीति,सिरडी मंदिर और मंदिरों के धन दर्शन पर बिचारशील नजर आई। बद्रीनाथ और केदारनाथ नाथ समिति का ध्यान भी चढ़ावे पर अधिक होता है। भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए हर भारतीय को सतत प्रयास करने चाहिए। राज्य सरकारों को इस कोढ से बचने के लिए स्वयं को निश्चल प्रतिनिधित्व  देने में योगदान देने की आशा की जाती है। अंत में हम सभी भारतीय एक ही परमेश्वर की संन्तान हैं।देश की मान-प्रतिष्ठा,सुरक्षा, और सांस्कृतिक सुरक्षा का दायित्व हर नागरिक का है।जय अखंड भारत। भारत माता की जय।