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हर्ष भरा – वर्ष नया
January 1, 2020 • डॉ.वहाब • साहित्य

हर्ष भरा – वर्ष नया

जग में नया वर्ष आया  

दिशाओं में रव हर्ष है गूंजा l

उम्मीदों को जगाने 

उमंगों को भरने 

फिर से सोत्साह आया l

छिपे जन - मन में बीज आस्था के 

पुनः अंकुरित करने आया l 

जीवन में आशाओं के नव तरंग 

आलोड़ित करने आया l 

अतीत के पतझड़ को भुलाकर 

वर्तमान के नव वसंत को भरने आया l

दुःख के अंधियारे को दूर कर 

सुख के नवल किरण बिखेरने आया l

समता समभाव को बढ़ाकर 

मनुष्यता का संचार जन मन में करने आया l 

नारी स्वाभिमान की रक्षा कर जग में 

नारी सुरक्षा का भाव बढाने आया l

असुरक्षा अन्याय अत्याचार आदि से त्रस्त

जन मन को सुस्थिर आश्वासन देने आया l 

आतंक की अति से पीड़ित जग को -

आतंक का उन्मूलन कर जग से – जग में 

शान्ति - सुमन विकसित करने आया l

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