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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर की प्रिंसिपल का पंजीकरण रद्द करने की मांग
June 2, 2020 • क़ुतुब मेल • राष्ट्रीय

कानपुर - जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर की प्रिंसिपल डॉक्टर आरती लालचंदनी के जरिए सामाजिक ताने-बाने की बिगाड़ने की कोशिशों का संज्ञान लेते हुए इंडियन मुस्लिम फॉर प्रोग्रेस एंड रिफॉर्म्स के कार्यकारी निदेशक खालिद अंसारी ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को इस संबंध में एक पत्र लिखकर उनका ध्यान आकर्षित करते हुए उनसे संज्ञान लेने की अपील की है। इम्पार के कार्यकारी निदेशक खालिद महमूद ने भारत के स्वस्थ मंत्री डॉ हर्षवर्धन के डब्ल्यूएचओ कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष बनने पर इम्पार की ओर से बधाई संदेश भेजते हुए कहा है कि हमें दृढ़ता के साथ आशा है कि आपके मार्गदर्शन में, डब्ल्यूएचओ एक नई ऊंचाई पर पहुंचेगा और भारत इस स्वास्थ्य संकट से दुनिया को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

साथ ही इम्पार की ओर से पत्र में कहा गया है कि "हम एक दुर्भाग्यपूर्ण समाचार की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। जब हमारा पूरा देश एकजुट होकर COVID-19 महामारी से लड़ने की कोशिश में जुटाए है, तो जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर की प्रिंसिपल, डॉ आरती लालचंदनी, सामाजिक सद्भाव को नष्ट करने और एक समुदाय विशेष को घृणास्पद भाषण के माध्यम से बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं।  इम्पार ने अपने पत्र के साथ डॉ आरती लालचंदनी के बयानों की वीडियो क्लिप भी संलग्न कर स्वस्थ मंत्री को भेजी है। इम्पार ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि डॉ। आरती का वक्तव्य सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है। चूंकि, डॉ। आरती लालचंदनी एक सरकारी कर्मचारी और विशेष रूप से एक डॉक्टर हैं, ऐसे में उनको अपने पेशे में भेदभाव करने, अभद्र भाषा देने और किसी विशेष समूह या समुदाय को आतंकवादी कहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

डॉ। आरती का कथन पैरा 3 (1) (i) के पूर्ण अखंडता बनाये रखने के नियम, नियम 3 (1) (iii) का एक सरकारी अधिकार होने के नाते उल्लंघन है। 3 (1) (vi) उच्च नैतिक मानकों और ईमानदारी को बनाए रखता है, 3 (1) (XVI) निष्पक्षता और उसके साथ कार्य करने और किसी एक के खिलाफ भेदभाव न करने की बात करता है, 3 (1) (XVIII) कुछ भी करने से बचना चाहिए जो कानून, नियम, और स्थापित प्रक्रिया के विपरीत है  (9) सीसीएस आचरण नियम, 1964 की सरकारी नीति की आलोचना। जैसा कि उन्होंने कहा है कि यूपी के माननीय सीएम तुष्टीकरण की नीति अपना रहे हैं।

उन का कथन पैरा 1 (1.1) का उल्लंघन है कि एक चिकित्सक को अपने पेशे की गरिमा और सम्मान को बनाए रखना होगा। साथ ही पैरा 1 (.2.1) जिस में कहा गया है कि चिकित्सक को चिकित्सा पेशे का प्रमुख उद्देश्य मानवता के लिए पूरे सम्मान के साथ सेवा प्रदान करना है और इस पेशे को बनाये रखना सम्मान के साथ उस की ज़िम्मेदारी है और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए 2002 के मेडिकल आचार नियमन संहिता का उल्लंघन।

डॉ आरती लालचंदनी ने सीसीएस कंडक्ट रूल्स, 1964 की कोड ऑफ मेडिकल एथिक्स रेगुलेशन, 2002 की विभिन्न लाइन का उल्लंघन किया है और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। खालिद अंसारी ने तमाम नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि आप इसके संदर्भ में उनके मेडिकल पंजीकरण को रद्द करने पर विचार करने के लिए MCI को निर्देशित करें और उन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के लिए संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दें। इम्पार ने कहा है कि ऐसा करने से उन लोगों को सख्त संदेश जाएगा जो सामाजिक ताने बाने को बिगाड़ने और भारत की छवि को धूमिल करने में लगे हुए हैं। अब देखना यह है कि सरकार की ओर से इस पूरे मामले में क्या रद्दे अमल आता है।