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जीवन के तीन H,H,H जिसने जीते वही योगी
November 5, 2019 • विजय सिंह बिष्ट

मानव शरीर में इन तीन अंगों की महत्त्वपूर्ण विशेषता है। जिनकी उपलब्धि से सामान्य मनुष्य महामानव तथा योगी हो सकता है। Head_शीर्षभाग भाल,माथा जिसमें दृष्टि,श्रर्व्य,श्रवण ,गंध,स्वाद सभी इंद्रियों का सम्मिश्रण है। यही वह भाग है जहां तिलक और ताज सजता है। शिव के त्रिनेत्र, विशाल जट्टा जूट,मां गंगा का धारण स्थल , तथा निर्मल चंद्र बिराजमान है।

शिव शक्ति ने ये सभी गुण मनुष्य में भी दिए हैं। क्योंक हम सभी शिव अंश ही तो हैं। सिर में निर्मल मस्तिष्क की रचना विवेक के ज्ञानार्जन के लिए की गई है  मस्तिष्क विकार रहित है उसमें सद्बुद्धि भरी है तो वह मुखरित होकर सारे नेक काम करवायेगी।मन की चंचलता और आत्मा की स्थिरता , head से ही संचालित होती है। हमें स्वाभिमान का पाठ सिर ही पढ़ाता है।वह चाहे अपना हो या भारत मां का,जाति धर्म की बलवेदी  पर भी वही न्योंछावर करवाता है।

💓 Heart-करुणा और दया का सागर दिल ही तो है।आस्था का जुड़ाव मन और मस्तिष्क से ही तो जुड़ा है। दिलों से जुड़ने से श्रृष्टि का निर्माण हुआ है। सभी जीव जंतु एक दूसरे पर इसीलिए तो निर्भर हैं। भोजन, हवा, आत्मरक्षा, निर्माण, ये सब दिलों का अपन्वत है। सभी धर्म हमें दिल से ही जोड़ कर ही तो प्यार और करुणा का संदेश देते हैं। विभिन्न जातियों का पारिस्परिक मेल से रिश्ते और गोत्र बने हैं। आज आवश्यकता है सारे भारत वासियों को ही नहीं सम्पूर्ण विश्व बिरादरी को दिलों से प्यार से करुणा से सौहार्द पूर्ण जीवन व्यतीत करने की।दिल और आत्मा का मिलन अटूट होता है।

Hand_कर्म का शिल्पी हाथ है।हाथ वे कलाकार हैं जिनसे निर्माण ही नहीं विध्वंश भी होते। उसके हाथ की तूलिका देव को दानव तथा पत्थर को ईश्वर का स्वरूप प्रदान कर सकते हैं। हाथ ही तो मिलते हैं ईमानदारी और बेइमानी की गांठ बांधने के लिए। जो हाथ स्नेह दया और करुणा लिए आगे बढ़े हैं उन्ही से  इस संसार की रचना हुई है।
शिव परिवार किसी की सवारी बैल , कोई सिंह बाहिनी,मयूर पर आरूढ़, गणेश का वाहन मूषक, शिव जी सर्पो की माला धारण किए फिर भी एकता की मिसाल, परस्पर हाथ मिलाने वाले अलग अलग शस्त्रधारण करने पर भी सबको आशीर्वाद , यह सब हाथ का ही कमाल था। आज भी हम अपने हाथों में ईमानदारी की मशाल लेकर चलें तो बेइमानी भ्रष्टाचार, अनाचार ,द्रुराचार सारे दूर किए जा सकते हैं।
       H,की सीढ़ी बनायें हाथों से अवलंम्ब दें,मन से दृढ़ निश्चय करें, और निर्विकार चढ़ते चलें, सफलता आप को अवश्य मिलेगी। सार्थक जीवन के तीन H,H,H महत्वपूर्ण हैं।