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जिसे प्यार नहीं मातृभूमि से मृतक और अभागा है
March 17, 2020 • विजय सिंह बिष्ट • साहित्य

विजय सिंह बिष्ट

गुफा कंदराओं से उतराखंण्डी जागा है।
जिसे प्यार नहीं मातृभूमि से मृतक और अभागा है।
गंगा यमुना का उद्गम उफन कर आया है।
किरीट हिमालय का उत्तराखण्ड पर छापा है।
बोल उठा जनमानस उत्तराखण्ड हमारा है।
नर नारी बाल वृद्ध का यही एक नारा है।

सुन नहीं रहा मुलायम चुप्पी साधे शासन है।
नारी का चीरहरण किया वह दुष्ट दुशासन है।।
भूल चुका वह अब भी कई कृष्ण मुरारी हैं।
मातृभूमि की रक्षा में अनेकों नेक पुजारी हैं।

लेके रहेंगे उत्तराखण्ड पक्का संकल्प हमारा है।
जनमानस मुखरित हो उठा यह प्रदेश हमारा है।
सड़कों गलियों गांव गांव से आज एक ही नारा है।                                                                                          उत्तराखण्ड लेके रहेंगे  यह प्रदेश हमारा है।

इस पावन धरती पर शिव ने अलख जगाया था।
गोरखों को पछाड़ा फिरंगियों को भगाया था।
उस धरती के बीर सपूतों ने फिर संघर्ष उठाया है।
गुफा कंदराओं से नरसिंह बन फिर दहाड़ा है।

बद्री केदार के संत तपस्वी प्राणों की आहुति देंगे।
प्राणों की बलि देकर भी उत्तराखंडी राज लेंगे।
सुनो देश के कर्णधार मत चुप्पी साधो।
अच्छा होगा उत्तराखण्ड की सीमा बांधों।
 हर मानव से विनय यही विकास हमारा नारा है।
उत्तराखंडी जाग उठा है उत्तराखण्ड हमारा है।