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खेलूंगी मैं कैसे होली कौन जरेगा हाय ठिठोली 
March 8, 2020 • सुषमा भंडारी • साहित्य

सुषमा भंडारी

द्वार तकूं भीगे नैनों से आया न हरजाई क्यूं 
बाट निहारूं पल-पल तेरी तूने देर लगाई क्यूं

चौक बुहारूं आंगन लीपूं रंगोली में सथिये खीन्चूं
जल भरने मै जाउँ घाट पर कांपती- सी घबराई क्यूं
तूने देर लगाई क्यूं

चन्दा आवे सूरज आवे कोयल आकर गीत सुनावे 
बरस बीत गये तुम न आये सूरतिया न दिखाई क्यूं
तूने देर लगाई क्यूं

न कोई खत है न सन्देशा जाकर बैठ गये हो विदेशा 
फागुन का महीना है आया याद सभी बिसराई क्यूं 
तूने देर लगाई क्यूं

खेलूंगी मैं कैसे होली कौन जरेगा हाय ठिठोली 
चूड़ी-बिन्दिया-कंगन सूना मुझसे रूठे कन्हाई क्यूं 
तुने देर लगाई क्यूं।