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कोरोना का विवरण हजारों साल पहले लिखा और वर्णित किया गया
April 23, 2020 • विजय सिंह बिष्ट। • राष्ट्रीय

विजय सिंह बिष्ट

कोरोना की महामारी ने समस्त विश्व को विचलित कर दिया है। इस अज्ञात शत्रु  ने युद्ध की विभीषिकाओं को भी पीछे छोड़ दिया है।ऐसा तो महाभारत के युद्ध में भी अप्रत्याक्षित रूप से जन हानि नहीं होगी। आखिर यह वायरस इतना प्रबल रूप कैसे धारण करता है जब कि वैज्ञानिक इसको निर्जीव मानकर चल रहे हैं। आजकल सारे बुद्धिजीवी इसको चीन द्वारा निर्मित वायरस बता रहे हैं। तो कोई रामचरितमानस की पृष्ठ संख्या 538पर अंकित चौपाइयों और दोहे का उदाहरण दे रहे हैं। कुछ जीवविज्ञान के पुस्तकों में कोरोना को दिखा रहे हैं।मानस की चौपाइयों पर रेखांकित कर के दिखाया जाता है कि सब कै निंदा जे जड़ करहीं, ते चमगादुर होइ अवतरहीं।

इस में न तो ऊपर की चौपाइयों को अर्थ लिया जा रहा है। नहीं नीचे की पंक्तियों को लिया जा रहा है। वास्तव में यह रोग तुलसी दास की इन प्रारसंगिक पंक्तियों में या तो पूर्व में हुए रोग की ओर इशारा करता है अथवा भविष्यवक्ता के रूप में चेतावनी देते हैं। वैसे यह आवश्यक है कि जब विद्वान का उपहास होने लगता है अथवा अज्ञान चरम पर हो तब हानिकारक कारक पैदा होगे ही। इस पृष्ठ की सारी चौपाइयां और दोहे इस रोग की पूर्ण विवेचना करते हैं। किन्तु बचाव में रोगग्रस्त व्यक्ति से दूरी ही उपाय बताया गया, अथवा समाधि शब्द का प्रयोग भीतर रहने के लिए किया गया है।प्रीति वियोगी से लगता है कि हमें एक दूसरे से आपस में नहीं मिलेगा। समस्त रोगों की उत्पत्ति शरीर से ही होती है।

हमारे शरीर में जैसे श्वेद पसीने से जूं पैदा हो जाते है, मलेरिया के मच्छर रुके हुए पानी में, डेंगू के साफ पानी में,हैजा चेचक भी संक्रमित रोग है। कालाजार इंन्फुलिन्जा,सर्दी जुखाम भी संक्रामक हैं।ये जीवाणु जनित रोग कहें जाते हैं।इनका उपचार भी ढूंढा गया है। लेकिन जिस कोरोना का विवरण हजारों साल पहले लिखा और वर्णित किया गया है उसके उपचार की दवा अभी तक नहीं ढूंढी जा सकी आज के वैज्ञानिक युग में अटपटी सी लगती है बर्तमान में जो दिशा निर्देश शासन की ओर से दिए जा रहे हैं उनका पालन करना हर नागरिक को करना चाहिए।हमारी रक्षा में चिकित्सकों,नर्सो , पुलिस विभाग ,स्वयंसेवी संस्थाओं का योगदान अवर्णीय है उनका सम्मान हृदय से करना हमारा धर्म और कर्म होना चाहिए। वैसे वर्तमान में रामराज्य की तरह कोई दुखी और दीन भी नहीं है केंद्र और राज्य सरकारें जनहित में लगी हुई हैं।मात्र अनुशासन बनाए रखना है वह भी जान है तो जहान है
कोरोना भगायेंगे।
देश बचायेंगे।