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लॉक डाउन हर- पल ,हर-क्षण खौफ़ का तजुर्बा
May 18, 2020 • सुषमा भंडारी • साहित्य

सुषमा भंडारी

लॉक डाउन का तजुर्बा 
लॉक डाउन जीवन का सबसे बड़ा तजुर्बा 
मेरे लिए ही नहीं समस्त मानव जाति के लिये
हर- पल ,हर-क्षण खौफ़ का तजुर्बा
अपने ही घर में कैद होने का तजुर्बा
भूख- प्यास- बदहाली का तजुर्बा
सबके साथ रहकर भी अकेलेपन का तजुर्बा

आदमियत का तजुर्बा
इंसानियत का तजुर्बा
रुपये की कीमत का तजुर्बा
अहम व औकात की कहानी का तजुर्बा
चहल- पहल से सूनेपन तक जाने का तजुर्बा
अपने गाँव, अपने रिश्ते, अपने परिवारों के विस्थापन का तजुर्बा
विदेशों की चकाचौंध का तजुर्बा
घर लौटते प्रवासियों का तजुर्बा
मालिकों का तजुर्बा
मजदूरों का तजुर्बा

दिहाड़ी मजदूरों की भूख का तजुर्बा
सरकार का तजुर्बा
सरकारी कर्मचारियों का तजुर्बा
घंटों तक कतार में लगने के बाद खाना व राशन मिलने का दर्दनाक तजुर्बा
सडकों पर ही नवजातों का तजुर्बा
बिलखते बच्चों का तजुर्बा
रेल की पटरियों पर चलते, मरते ,कटते मजदूरों जा तजुर्बा
स्वच्छता की अनदेखी करने पर मिले हादसों क तजुर्बा
स्वच्छता को सुरक्षित रखने के साधनों का तजुर्बा
स्वच्छ्ता सैनिकों के कार्य , उनकी मौत का तजुर्बा

बीमारों की सेवा करने वाले सेवकों ( डॉक्टर, नर्स) का तजुर्बा
यातायात के बंद होने का तजुर्बा
दो गज दूरी का तजुर्बा
स्कूलों की डिजिटल परीक्षाओं का तजुर्बा
ई लर्निंग शिक्षा/ गृहकार्य का तजुर्बा
दूसरे राज्यों में फंसे छात्र/ छात्राओं का तजुर्बा
उच्च कक्षाओं की परीक्षाओं व परिणामों का तजुर्बा
छूत, अछूत की बीमारी व नाम का तजुर्बा
सरकारी , गैर सरकारी संस्थाओं की इमानदारी व बईमानी का तजुर्बा

सरकारी कर्मचारियों पर आई आपदा का तजुर्बा
लॉक डाउन के दौरान उपजे अन्य कौशलों का तजुर्बा
वर्क फ्रॉम हौम का तजुर्बा
ऑन लाइन सभाओं का तजुर्बा
बच्चों / बड़ों की कलाओं का तजुर्बा
अस्पतालों में, सडकों पर लावारिस चिताओं का तजुर्बा
सीमाओं की बन्दिशों का तजुर्बा
आस्थाओँ का तजुर्बा 
दरिद्रताओं का तजुर्बा
तमन्नाओं का तजुर्बा 

वैक्सीन ढूंढने का तजुर्बा 
जिन्दगी के बहुत से तजुर्बे होते हैं
किन्तु ये लॉक डाउन का तजुर्बा 
एक- एक दिन एक - एक साल का रहा है
कभी न भुलाया जाने वाला समय 
जिसमें खार ही खार कोई फूल नहीं
भूल ही भूल जो की गई थी पिछ्ले बीते समय में 
जिसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है आज
संसार की हर पीड़ी को कोरोना के रूप में
पल - पल , क्षण- क्षण एक तजुर्बा। ।।।।।।।
सुषमा भंडारी