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माँ (हाइकू)
May 10, 2020 • डॉ.शेख अब्दुल वहाब • साहित्य

 

डॉ.शेख अब्दुल वहाब ,

हिंदी एसोसिएट प्रोफेसर, तमिलनाडु

माँ
दुलारती है  
दुत्कारती कभी न
माता है वह । 1 l 

जग में माता
ईर्ष्या न द्वेष मन 
ममतामयी । 2 l

स्वयं भूखी है

भरे पेट संतान

दूजा न, माँ l 3 l 

बेटी जो बढ़े
मन सरोज खिले
मात्र माता ही । 4 l

बेटी का ब्याह 
चली वह ससुराल
मां मन दुखी । 5 l

बेटा पढे जो
पद उसका बढ़े 
मां मन फूले । 6 l 

कोई आंके न 

त्याग - ममता मूल्य 

माँ अनमोल l 7 l  
 

बच्चों को नींद

रतजगे स्वयं ही

           माँ सी माँ होती l 8 l
माँ देती ज्ञान

चलती पाठशाला

पहली गुरु l 9 l

पेड़ की छाँव

झेलती धूप जेठ

माँ ठंडक है l 10 l