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रोटरी पीएम केयर्स फंड में 30 करोड़ रु के योगदान से लेकर ज़रूरतमंदों को भोजन,पीपीई उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं
April 29, 2020 • नूरुद्दीन अंसारी • अंतर्राष्ट्रीय

नई दिल्ली: कोविड-19 के चलते अप्रत्याशित हालात के मद्देनज़र देश भर में रोटरी के सदस्यों ने कोविड-19 के खिलाफ़ लड़ाई में सहयोग के लिए भारत सरकार को 30 करोड़ रु का योगदान दिया है। ‘‘कोविड-19 के खिलाफ़ लड़ाई में रोटरी के सदस्यों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।’’ केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने कहा, जिन्होंने उन्हें अपने प्रयासों को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया है। रोटरी के सदस्य आइसोलेशन और डर के प्रभावों से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए कोविड-19 के संकट के बीच उम्मीद की किरण की भूमिका निभा रहे हैं। ये सदस्य स्वास्थ्य कर्मियों और फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स को सहयोग प्रदान कर रहे हैं जो इस महामारी से लड़ाई में अगली पंक्ति में मोर्चे पर डटे हैं। 

अब तक भारत में 4000 रोटरी क्लब्स के 1.5 लाख रोटरी सदस्यों ने 75000 पीपीई किट्स, एक करोड़ से अधिक फेस मास्क, भोजन और अनाज के 650,000 पैकेट और 25 लाख से अधिक ज़रूरतमंदों को भोजन वितरित किया है।

 शेखर मेहता, प्रेज़ीडेन्ट-नॉमिनी, रोटरी इंटरनेशनल 2021-22 ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के लिए विश्वस्तरीय प्रयासों की आवश्यकता है। रोटरी के सदस्य स्थानीय प्रसाशनों के साथ मिलकर ज़रूरतमंद लोगों को भोजन, चिकित्सा उपकरण, सैनिटाइज़र, मास्क एवं अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करा रहे हैं। रोटरी के सदस्य कोविड-19 के ग्राफ को नीचे लाने के लिए प्रयासरत हैं और समुदायों में सबसे ज़्यादा प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं। इस मुश्किल समय में हर ज़रूरतमंद को सहयोग प्रदान करना हमारी ज़िम्मेदारी है। हमें इस महामारी से जीतने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा।’’

जिस तरह दुनिया भर से पोलियो के उन्मुलन में रोटरी के लक्ष्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, रोटरी और इसके साझेदार, विश्वस्तरीय पोलियो उन्मूलन अभियान में इस्तेमाल किए गए ढांचे और बुनियादी सुविधाओं- जैसे उपकरणों, कार्यबल, व्यापक निगरानी नेटवर्क का इस्तेमाल कोविड-19 की रोकथाम, इसकी तैयारी एवं आपदा प्रतिक्रिया के लिए करेंगे। रोटरी सरकारों के साथ मिलकर समुदायों को वायरस के बारे में जागरुक बनाने के लिए भी काम कर रहा है। फ्रंटलाईन कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, क्योंकि वे संक्रमण के सबसे ज़्यादा जोखिम पर हैं।