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शाहीन बाग़ आंदोलन 100 दिन बाद हटा
March 25, 2020 • आरिफ़ जमाल • राष्ट्रीय

आरिफ़ जमाल 

देश के इतिहास में सबसे ज्यादा दिनों तक चलने वाला दिल्ली का शाहीन बाग़ आंदोलन 24 मार्च 2020 की सुबह दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा पूरी तरह से हटा दिया गया । CAA के खिलाफ 100 दिनों तक चलने वाले इस आंदोलन ने देश और दुनिया को अपनी तरफ आकर्षित किया साथ ही दुनिया भर में इतना बड़ा अहिंसात्मक आंदोलन शायद ही दुनिया के किसी देश या शहर में हुआ होगा । शाहीन बाग़ आंदोलन की जो सबसे बड़ी विशेषता थी वह थी इस पूरे आंदोलन में महिलाओं की भूमिका प्रमुख रूप से थी । महिलाओं के हाथ में ही इस आंदोलन की कमान थी । इस आंदोलन से प्रेरित होकर दिल्ली के अलावा देश के अन्य राज्यों में लगभग 200 जगहों पर शाहीन बाग़ की तर्ज़ पर आंदोलन हुए और सभी जगह पर महिलाओं ने ही आंदोलन की कमान अपने हाथों में रखी। 

इस आंदोलन के चलते नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की दुनिया भर में काफी किरकिरी हो रही थी । केंद्र सरकार और दिल्ली की केजरीवाल सरकार दोनों ही काफी समय से इस आंदोलन को खत्म करवाने का रास्ता खोज रहे थे लेकिन कोई रास्ता नहीं मिल रहा था ।

आजकल दुनिया भर में कोरोना वायरस को लेकर 150 से ज्यादा देश इस महामारी से जूझ रही है । भारत भी इस कोरोना वायरस की चपेट में आ चुका है लगभग 500 से ज्यादा लोग इस वायरस के चपेट में आ चुके हैं और इस वायरस के कारण अनेक लोगों की मौत हो चुकी है इस गंभीर बीमारी से बचाव और सुरक्षा के लिए भीड़भाड़ से दूर रहने और कई तरह की सावधानियां बरतने की जरूरत है।  ऐसे में केंद्र सरकार ने देश भर में लाक डॉउन की घोषणा कर दी यह घोषणा इस आंदोलन को रोकने और प्रदर्शनकारियों को हटाने का एक कारगर और मजबूत आधार बन गया और इस आंदोलन को तोड़ने और हटाने में सरकार जुट गई । आंदोलनकारी महिलाएं किसी भी हालत में इस आंदोलन को खत्म करने के पक्ष में नहीं थीं ।

कोरोना वायरस से बचाव के लिए वह मास्क और दूसरे सुरक्षा के सभी उपाय के साथ धरना स्थल पर बैठी थी लेकिन सरकार हर हाल में इस आंदोलन को खत्म करवाना चाहती थी। इस आंदोलन को प्रभावित करने और कमज़ोर करने के लिए कुछ लोगों ने प्रदर्शन स्थल पर गोली चलाई,पेट्रोल बम्ब फैंकें लेकिन यह आंदोलन बिना किसी दर के लगातार चलता रहा और 100 दिन तक चले इस आंदोलन ने देश और दुनिया को यह संदेश देने में सफलता हासिल की कि अगर महिलाएं सरकार की नीतियों के खिलाफ अगर सड़क पर उतरती है और अपनी आवाज़ बुलंद करने पर आ जाये तो इतिहास बना सकती है।